Tuesday, October 4, 2011

बक्षी साहब का एक नायाब नग़मा


गाना - कभी लाया झुमके न लाया  चुनरिया
फिल्म - हम दीवाने (१९६५)
गीतकार - आनंद बक्षी
संगीतकार - अन्ना साहब (सी. रामचंदर)
गायक - आशा भोसले, चितलकर (सी. रामचंदर) और साथी



कभी लाया झुमके न लाया  चुनरिया
सिर्फ प्यार को मैं करूँ क्या सांवरिया
भला क्या  हैं झुमके  तो क्या  है चुनरिया
तेरे नाम लिख दी है  मैंने उमरिया

निकलती है  बन-ठन के हर एक सहेली
पड़ी रहती हूँ मैं  ही घर में अकेली
मुझे ताने देती है  सारी नगरिया
सिर्फ प्यार को मैं करूँ क्या सांवरिया

बता क्या करेगी पहन के  तू  झुमके
तेरी चाल में  तो  हैं  वैसे ही  ठुमके
मेरी जान तू  तो  है  यूँही बिजुरिया
तेरे नाम लिख दी है  मैंने उमरिया

शुरू में  किया तूने हर  एक  वादा
मगर प्यार  होते ही  बदला इरादा
जिया लेके ली न  कभी  फिर खबरिया
सिर्फ प्यार को मैं करूँ क्या सांवरिया

तेरी माँग अपनी मोहब्बत से भर दूँ
तेरे  आज सारे गिले दूर कर दूँ
ज़रा मुस्कुरा के  मिला तो  नजरिया
तेरे नाम लिख दी है  मैंने उमरिया

Monday, October 3, 2011

A Rare Gem From Bakshi Sahab


Song - Kabhi Laaya Jhumke Na Laaya Chunariya
Film - Hum Diwane (1965)
LY - Anand Bakshi
MD - Anna Sahab (C. Ramchander)
Singers - Asha Bhosle, Chitalkar (C. Ramchander) & Saathi


Kabhi Laaya Jhumke Na Laaya Chunariya
Sirf Pyaar Ko Main Karoon Kya Sanwariya
Bhala Kya Hain Jhumke To Kya Hai Chunariya
Tere Naam Likh Di Hai Maine Umariya 


Nikalti Hai Ban-Than Ke Har Ek Saheli
Padi Rehti Hoon Main Hi Ghar Mein Akeli
Mujhe Taane Deti Hai Saari Nagariya
Sirf Pyaar Ko Main Karoon Kya Sanwariya


Bata Kya Karegi Pahen Ke Too Jhumke
Teri Chaal Mein To Hain Waise Hi Thumke
Meri Jaan Too To Hai Yoonhi Bijuriya
Tere Naam Likh Di Hai Maine Umariya


Shuroo Mein Kiya Toone Har Ek Vaada
Magar Pyaar Hote Hi Badla Iraada
Jiya Leke Lee Na Kabhi Phir Khabariya
Sirf Pyaar Ko Main Karoon Kya Sanwariya


Teri Maang Apni Mohabbat Se Bhar Doon
Tere Aaj Saare Gile Door Kar Doon
Zara Muskura Ke Mila To Najariya
Tere Naam Likh Di Hai Maine Umariya

Sunday, October 24, 2010

हर इक पल का शायर - साहिर (Har Ik Pal Ka Shayar - Sahir)

मार्च ८, १९२१ में लुधियाना के एक ज़मींदार के घर अब्दुल हयी का जनम हुआ. उस समय किसी को पता नहीं था कि  यह नन्हा अब्दुल हयी एक दिन साहिर बनेगा, साहिर लुधयनवी!




साहिर का मतलब है जादूगर, साहिर सचमुच का जादूगर था, शब्दों का जादूगर.
  


साहिर यूँ तो ज़मींदार के घर पैदा हुए थे लेकिन उनका बचपन दुखों में गुज़रा क्योंकि उनके बचपन में ही उनके बाप और माँ आपसी रंजिशों की वजह से अलग हो गये थे. इसका असर साहिर पे बाहौत गहरा पड़ा और वो जवानी में क़दम रखते रखते बड़ी दिलशिकन शायरी करने लगे.




१. ये महलों ये तखतों ये ताजों की दुनिया - प्यासा   


कॉलेज में उनकी शायरी के चर्चे ज़ोरों-शॉरों से होने लगे और वो सबके चहीते शायर बन गये, ख़ास तौर पे लड़कियों के. कई बार इश्क़ हुआ, कई बार दिल टूटा...  


२. महफ़िल से उठ जानेवालों तुम लोगों पर क्या इल्ज़ाम - दूज का चाँद   



विभाजन के बाद साहिर लाहौर चले गये. वहाँ उन्हों ने कई अख़बारों और रिसालों के लिए लिखा लेकिन उनका दिल ना लगा और वो वापस हिन्दुस्तान आ गये और कुछ दिन दिल्ली रुक कर मुंबई चले गये और फिल्मों में गीत लिखना शुरू कर दिया. एक के बाद एक गीत हिट होते गये और साहिर का जादू लोगों पर चढ़ने लगा.


३. तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यूँही मस्त नगमे लुटाता रहूँ - हमराज़ 


  साहिर यूँही नगमे लुटाता रहा लेकिन साहिर का साथ किसी ने ना दिया! साहिर के घर महफिलें जमती दोस्त एहबाब आते सुर छिड़ता साज़ बचता शराब आती कबाब आते लेकिन साहिर अकेला रह जाता. दिल का दर्द दिल में लिए सुलगता रहा साहिर. साहिर तन्हा था तन्हा रहा....नगमे लुटाता रहा....पर्वत-पर्वत बस्ती-बस्ती गाता रहा...
  
४. पर्वत पर्वत बस्ती बस्ती गाता जाए बंजारा लेकर दिल का इकतारा - रेलवे प्लेटफार्म  



साहिर जो हर इक दिल में बस्ता था लेकिन तन्हा था, साहिर जो हर शख्स का चहीता था लेकिन जिसे चाहत ना मिली, साहिर जो हर इक पल का शायर था, २५ अक्तूबर, १९८० को ये कहता हुआ दुनिया से रुखसत हो गया.... 

५. मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है - कभी-कभी 



Wednesday, July 21, 2010

हाफ़िज़ खुदा तुम्हारा Erum

हमारी प्यारी दोस्त इरम अब इस दुनिया में नहीं रहीं...

Thursday, May 27, 2010

नूर का टुकड़ा

तस्वीर है या नूर का टुकड़ा
रौशन हो गईं यादें सारी

फूल की खुशबू
चाँद की मिस्री
सुबह की रंगत
शाम की सुर्खी
तेरी अदा इन सबपे भारी

नूर का टुकड़ा
आँख में लेकर
आग का दरिया
होंट में भरकर
मुझसे मिलेगी वो चिंगारी


Noor Ka Tukda

Tasveer Hai Ya Noor Ka Tukda
Roshan Ho Gayeen Yaadein Saari


Phool Ki Khushboo
Chaand Ki Misri
Subah Ki Rangat
Shaam Ki Surkhi
Teri Ada In Sab Pe Bhaari


Noor Ka Tukda
Aankh Mein Lekar
Aag Ka Dariya
Hont Mein Bharkar
Mujhse Milegi Wo Chingaari

Thursday, October 1, 2009

गुलज़ार साहब का एक प्यारा गीत

फिल्म: मंजु (मलयालम) १९८२
गीत: गुलज़ार
संगीत: ऍम. बी. श्रीनिवासन
गायक: भूपेंद्र

रसिया मन् बहकाए
रसिया...रसिया...रसिया
रसिया मन् बहकाए

रूप रूप की रेखा छाने
रूप को पूजे, रूप को माने
रूप से धोके खाए
रसिया मन् बहकाए
रसिया मन् बहकाए

रसिया मन् बहकाए
रसिया...रसिया...रसिया
रसिया मन् बहकाए

रसिया मन् बहकाए

रस का लोभी रंग रंग भंवराए
रसिया मन् बहकाए
रसिया मन् बहकाए

रूप रूप की रेखा छाने
रसिया...रसिया...रसिया
रूप रूप की रेखा छाने
रूप को पूजे, रूप को माने
रूप से धोके खाए
रसिया मन् बहकाए
रसिया मन् बहकाए

दिन सेकूँ तो आँच न आए
रात निगोड़ी हिम बरसाए
दिन सेकूँ तो आँच न आए
रात निगोड़ी हिम बरसाए
चाँदनी आग लगाए
चाँदनी आग लगाए
रसिया मन् बहकाए
रसिया मन् बहकाए
रसिया... मन् बहकाए...

Wednesday, May 6, 2009